Thursday, December 25, 2008

चर्चे

१) हम न होते तो हमारे चर्चे होते

तुम न होते तो बहुत कम खर्चे होते

२) दिल की बात जुबान पर लाकर बहुत दुःख देखा करते हैं

हमने सुना है इस बस्ती मैं कुछ दिलवाले भी रहते हैं

३) सावन का मौसम बदला , पतझड़ का मौसम आया है

फिर भी हमारे सूखे आंखों से टप- टप आँसू बहते हैं

४) ए यारों हमे न सताओ , यह हम नहीं हमारी परछाई है

सौ आईने तोड़ने पर भी तुम्हारी तस्वीर ही पाते हैं।


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