Friday, December 12, 2008

अलविदा बच्ची

इस धरती पर आने से पहले

तूने , न जाने कितने आकार बदले

कितना परेशान किया

कितना इंतजार कराया

अब क्या देखती है

उस आदमी की बन्दूक को

कितनो की जान ली

कितनों को खून से लतपथ किया

आज बोल,मुझे बता

क्या तू है बस एक बन्दूक की गोली

या तेरा कोई नाम है

बता तू , हिंदू है या मुसलमां

उस आदमी से तो इंतजार नहीं हुआ

काश तू ही इंतजार कर लेती

तू भी रातसोते समय सिरहाने पर , सिसकती तो होगी

गरम खून की महक अब तो तुझे व्याकुल करती होगी

अगर तू न होती तो यह आंतकवाद न होता !

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