Thursday, December 25, 2008

जब भारत वर्ष मैं जाड़ा आता है।


जब सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी धुप में खड़े होकर गप्पे लड़ाते हैं
अधिकारी कमरों में हीटर जलाकर मूंगफली खाते हैं
महिलायों के द्वारा कम के नाम पर स्वेटर बुना जाता है
जब बच्चे स्कूल न जाने का बहाना बनाते हैं
जम मम्मी गाजरें कद्दू कस कराती है
जब स्वेटर से ओदोनिल की महक आती है
जब कॉटन की जगह वूलन सोक्स पहनते हैं
जब मौसम विभाग के पास कुछ काम आ जाता है
जब ज्यादा आलस आता है
जब मोंडे सन्डे जैसा महसूस होता है
जब सन्डे को भी शादियों के कारन ट्रैफिक जैम होता है
जब दांत गुस्से से नहीं, किसी और वजह से किटकिटाने लगते हैं
जब गीसर से जाले उतारे जाते हैं
जब सपनों में ओल्ड मोंक दिखाई देती है
जब कडकडाती ठण्ड में कोई कलुया या रुमुया ठिठुर ठिठुर के मर जाता है
और सुबह का अखबार उसका नाम नहीं उसकी संख्यां बताता है
तो भारतवर्ष में जाड़ा आता है।









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